लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच पावर कॉरपोरेशन ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक जांच में स्मार्ट मीटर तय मानकों के अनुरूप और सटीक पाए गए हैं। हालांकि, मीटर की संयोजकता और सॉफ्टवेयर से जुड़ी जांच अभी जारी है। इसकी रिपोर्ट करीब 15 दिनों में आने की उम्मीद है।
218 सैंपल की जांच में मीटर सटीक मिले
जांच समिति ने स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता परखने के लिए 218 सैंपल की जांच की। रिपोर्ट के अनुसार मीटरों की सटीकता निर्धारित अनुमेय सीमा के भीतर पाई गई। इसके अलावा मीटरों की सटीकता की जांच के लिए 5.22 लाख चेक मीटरों के आंकड़ों का मिलान भी किया गया। समिति के मुताबिक स्मार्ट मीटर निविदा में तय शर्तों का पूरी तरह पालन करते पाए गए।
तीन स्मार्ट मीटरों की भी हुई जांच
उपभोक्ताओं की शिकायतों के आधार पर तीन स्मार्ट मीटरों को गोमतीनगर स्थित हाईटेक प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया था। जांच के परिणाम सफल रहे। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जांच किए गए मीटर स्मार्ट मीटर की निर्धारित आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।
मुख्यमंत्री के आदेश पर बनी थी चार सदस्यीय समिति
स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इनकी जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया। स्मार्ट मीटरों की शुरुआती जांच मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की हाईटेक प्रयोगशाला में कराई गई थी।
हालांकि, इस प्रयोगशाला के पास स्मार्ट मीटर पार्ट-1 और पार्ट-2 की जांच के लिए राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड यानी एनएबीएल की जरूरी मान्यता नहीं होने का मुद्दा भी सामने आया था। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की शिकायत के बाद एनएबीएल ने अपने जवाब में इसकी जानकारी दी थी।
स्मार्ट मीटर के बजाय दिए गए पौने तीन लाख कनेक्शन
स्मार्ट मीटर की जांच के बीच बिजली कनेक्शनों को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए हैं। स्मार्ट मीटर की निर्धारित लागत से अधिक वसूली और कास्ट डाटा बुक के प्रावधानों के उल्लंघन से जुड़े मामले में विद्युत नियामक आयोग में सुनवाई हुई। इस दौरान प्रदेश की पांचों बिजली कंपनियों के प्रबंध निदेशक व्यक्तिगत रूप से पेश हुए और शपथपत्र दाखिल किए।
सुनवाई में बताया गया कि 92,231 उपभोक्ताओं से अधिक वसूले गए 32 करोड़ 75 लाख रुपये उनके बिजली बिलों में वापस किए गए हैं। वहीं, पावर कॉरपोरेशन के आदेश के बावजूद करीब 75 प्रतिशत यानी 2 लाख 80 हजार से अधिक कनेक्शन गैर-स्मार्ट मीटर के दिए जाने की बात सामने आई।
3.75 लाख नए कनेक्शन में सिर्फ 92,231 स्मार्ट मीटर
विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने उपभोक्ताओं का पक्ष रखते हुए कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर को नए कनेक्शन में अनिवार्य किए जाने के बाद बिजली कंपनियों ने दोहरा मापदंड अपनाया। उनके मुताबिक 10 सितंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच 3,73,509 नए कनेक्शन दिए गए थे। 17 अगस्त तक के पावर कॉरपोरेशन के अपडेट आंकड़ों में यह संख्या बढ़कर 3,75,859 हो गई।
इन कुल नए कनेक्शनों में केवल 92,231 उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के जरिए कनेक्शन दिया गया। ऐसे में स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता जांच के साथ नए कनेक्शनों में स्मार्ट मीटर के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल बने हुए हैं।
सॉफ्टवेयर और संयोजकता की जांच का इंतजार
पावर कॉरपोरेशन की रिपोर्ट में मीटर की सटीकता और गुणवत्ता को मानकों के अनुरूप बताया गया है, लेकिन संयोजकता और सॉफ्टवेयर की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। इन दोनों पहलुओं की जांच रिपोर्ट आने के बाद स्मार्ट मीटर की पूरी कार्यप्रणाली को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
